जनवरी 2026 में शेयर बाजार कमजोर: Nifty 500 के करीब 70% शेयर लाल निशान में, विदेशी बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता का दबाव
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजारों में चौड़ाई कमजोर रही और Nifty 500 के लगभग 70% स्टॉक्स निगेटिव रिटर्न में रहे। रिपोर्ट में FII बिकवाली, वैश्विक अनिश्चितता और नीति/टैरिफ से जुड़ी चिंताओं का जिक्र है।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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भारतीय शेयर बाजार 2026 की शुरुआत में दबाव में दिखे। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 के शुरुआती हिस्से में Nifty 500 के लगभग 70% स्टॉक्स लाल निशान में रहे और बाजार की ब्रेड्थ (breadth) कमजोर रही। यह संकेत देता है कि गिरावट कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि व्यापक स्तर पर कई काउंटर दबाव में रहे। ([business-standard.com](https://www.business-standard.com/markets/news/70-of-nifty-500-stocks-in-red-in-jan-2026-what-s-next-for-indian-markets-126011400546_1.html/?utm_source=openai))

किस वजह से बढ़ा दबाव
रिपोर्ट में कारणों के तौर पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली, वैश्विक अनिश्चितता, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीति/ट्रेड से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख है। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर जोखिम घटाते हैं, जिसका असर स्मॉल/मिड-कैप समेत कई हिस्सों में साथ-साथ दिख सकता है। ([business-standard.com](https://www.business-standard.com/markets/news/70-of-nifty-500-stocks-in-red-in-jan-2026-what-s-next-for-indian-markets-126011400546_1.html/?utm_source=openai))
इंडेक्स स्तर पर क्या तस्वीर रही
बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक इसी अवधि में Nifty 500 और Nifty 50 दोनों में गिरावट दर्ज हुई। जब बेंचमार्क नीचे हो और साथ ही बड़ी संख्या में स्टॉक्स भी कमजोर हों, तो उसे बाजार की ‘कमजोर चौड़ाई’ माना जाता है—जो ट्रेडर्स और लॉन्ग-टर्म निवेशकों दोनों के लिए सावधानी का संकेत हो सकता है। ([business-standard.com](https://www.business-standard.com/markets/news/70-of-nifty-500-stocks-in-red-in-jan-2026-what-s-next-for-indian-markets-126011400546_1.html/?utm_source=openai))
निवेशक किन बातों पर ध्यान दें
- वैश्विक संकेत: अमेरिका/यूरोप में नीति, दरें और ट्रेड हेडलाइंस
- FII फ्लो और रुपया/बॉन्ड यील्ड की दिशा
- कमाई (earnings) और सेक्टर-वार गाइडेंस, खासकर घरेलू मांग आधारित सेक्टर्स
ऐसे फेज में रणनीति आम तौर पर जोखिम-प्रबंधन, पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और चरणबद्ध निवेश पर केंद्रित रहती है—क्योंकि अस्थिरता बढ़ने पर तेज उछाल और तेज गिरावट दोनों की संभावना रहती है। ([business-standard.com](https://www.business-standard.com/markets/news/70-of-nifty-500-stocks-in-red-in-jan-2026-what-s-next-for-indian-markets-126011400546_1.html/?utm_source=openai))