शेयर बाजार में तेज गिरावट: 23 जनवरी 2026 को सेंसेक्स 769 अंक लुढ़का, अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी दबाव
23 जनवरी 2026 को घरेलू शेयर बाजार में दोपहर बाद बड़ी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स में तेज गिरावट और निफ्टी के 25,100 के नीचे जाने का जिक्र है, जबकि अडानी ग्रुप के कुछ शेयरों में दो अंकों तक गिरावट की बात कही गई है।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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23 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बाद दोपहर के कारोबार में तेज बिकवाली देखने को मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, सेंसेक्स दिन में 800 अंक से अधिक तक फिसला और अंत में 769 अंक की गिरावट के साथ बंद होने की बात कही गई, जबकि निफ्टी 25,100 के नीचे चला गया।

गिरावट के केंद्र में क्या रहा
खबर में यह भी उल्लेख है कि अडानी ग्रुप के शेयरों में उल्लेखनीय दबाव दिखा और कुछ शेयरों में 13% तक गिरावट की बात सामने आई। ऐसे सत्र आम तौर पर बाजार के सेंटीमेंट, सेक्टर-रोटेशन और प्रमुख स्टॉक्स में तेज प्रॉफिट-बुकिंग/सेलिंग का संकेत देते हैं।
निवेशकों के लिए इसका मतलब
इस तरह की गिरावट निवेशकों के लिए दो बातें साफ करती है: (1) बाजार में रिस्क-ऑन से रिस्क-ऑफ का स्विच तेजी से हो सकता है, (2) बड़े समूहों/हाई-वोलैटिलिटी स्टॉक्स में एक ही सत्र में नुकसान बढ़ सकता है। खासकर जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में थीमैटिक या कंसन्ट्रेटेड हिस्सेदारी होती है, उन्हें रेंज-बाउंड दिनों में भी सतर्क रहना पड़ता है।
जोखिम प्रबंधन: क्या ध्यान रखें
- बड़े उतार-चढ़ाव वाले शेयरों में पोजिशन साइज सीमित रखें और स्टॉप-लॉस/रिस्क लिमिट तय करें।
- लॉन्ग-टर्म निवेश और शॉर्ट-टर्म ट्रेड को अलग रणनीति से संभालें।
- खबर/घटनाक्रम पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय वॉल्यूम, ट्रेंड और रिस्क प्रोफाइल देखें।
- डाइवर्सिफिकेशन और कैश बफर से गिरावट के दिनों का असर घटाया जा सकता है।
23 जनवरी 2026 की यह गिरावट बाजार की संवेदनशीलता को दिखाती है। निवेशकों के लिए संदेश यही है कि तेजी के साथ गिरावट भी बाजार का सामान्य हिस्सा है—जरूरी है कि रणनीति, समय-सीमा और जोखिम क्षमता स्पष्ट रहे।