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रिलायंस की वेनेजुएला तेल पर नजर: रूसी आयात घटने के बाद अमेरिका से मंजूरी की बातचीत

रूसी कच्चे तेल के आयात पर बढ़ते दबाव के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज वेनेजुएला से तेल खरीद फिर शुरू करने के लिए अमेरिकी मंजूरी चाह रही है. सूत्रों के मुताबिक कंपनी के प्रतिनिधि अमेरिकी विदेश और वित्त मंत्रालय से चर्चा कर रहे हैं.

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

भारत की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज रूसी तेल आयात घटने के बाद वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की ओर तेजी से देख रही है. डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस वेनेजुएला के कच्चे तेल की खरीद दोबारा शुरू करने के लिए अमेरिकी मंजूरी हासिल करने की कोशिश कर रही है. बताया गया है कि कंपनी के प्रतिनिधि इस बारे में अमेरिका के विदेश और वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहे हैं.

रिलायंस की वेनेजुएला तेल पर नजर: रूसी आयात घटने के बाद अमेरिका से मंजूरी की बातचीत
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रिलायंस का तर्क यह है कि वह नियमों के अनुरूप ही तेल खरीद पर विचार करेगी और गैर-अमेरिकी खरीदारों की वेनेजुएला के तेल तक पहुंच को लेकर ‘स्पष्टता’ का इंतजार कर रही है. कंपनी की तरफ से पहले दिए गए बयान में यही संकेत मिला कि अनुमति और शर्तों के आधार पर वह खरीद पर फैसला लेगी.

पृष्ठभूमि में अमेरिकी प्रतिबंध नीति और वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए (PDVSA) से जुड़े लाइसेंस अहम भूमिका निभाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस को पहले भी लाइसेंस मिले थे और 2025 के शुरुआती महीनों में आपूर्ति हुई थी, लेकिन बाद में कई लाइसेंस निलंबित किए गए और खरीदारों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा. ऐसे में अब रिलायंस के लिए कानूनी अनुमति और टैरिफ/प्रतिबंध जोखिम का प्रबंधन सबसे बड़ा मुद्दा है.

भारत के लिए यह सिर्फ एक कॉरपोरेट निर्णय नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों से जुड़ा सवाल भी है. रूस से आयात में कमी आने पर रिफाइनरियां उसी पैमाने पर विकल्प तलाशती हैं, ताकि घरेलू मांग, निर्यात अनुबंध और रिफाइनिंग मार्जिन पर असर सीमित रहे. वेनेजुएला का भारी क्रूड कुछ रिफाइनरियों के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त भी माना जाता है.

डीडब्ल्यू की रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि वेनेजुएला के तेल को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी हुई है, क्योंकि कई बड़ी तेल कंपनियां और ट्रेडिंग फर्में लाइसेंस और निर्यात नियंत्रण में अपनी हिस्सेदारी चाहती हैं. इसका मतलब यह है कि रिलायंस को केवल अनुमति ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक शर्तों, शिपिंग, भुगतान व्यवस्था और राजनीतिक जोखिम—हर स्तर पर सौदे की व्यवहार्यता देखनी होगी.

आने वाले समय में यह कहानी इस पर निर्भर करेगी कि अमेरिका किस तरह की अनुमति/छूट देता है और वेनेजुएला के साथ कूटनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं. ऊर्जा बाजार के लिहाज से, यह फैसला भारतीय रिफाइनिंग रणनीति और वैश्विक क्रूड फ्लो दोनों पर असर डाल सकता है.

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

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