भारत-ईयू FTA वार्ता पूरी: 18 साल बाद समझौते के ऐलान की तैयारी, 27 जनवरी को घोषणा की उम्मीद
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 जनवरी को औपचारिक घोषणा हो सकती है, जबकि लागू होने से पहले कानूनी जांच और मंजूरियां जरूरी होंगी।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 18 वर्षों से अटकी वार्ता पूरी हो गई है और औपचारिक घोषणा 27 जनवरी 2026 को होने की उम्मीद जताई गई है। यदि यह आगे बढ़ता है, तो इसे भारत की सबसे लंबी व्यापारिक वार्ताओं में से एक के तौर पर देखा जाएगा और भारत-ईयू आर्थिक संबंधों में नया अध्याय खुल सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह डील: व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच
रिपोर्ट में बताया गया है कि यूरोपीय संघ वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है। 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर रहने का अनुमान भी रिपोर्ट में दिया गया है। इस पृष्ठभूमि में FTA का मतलब सिर्फ टैरिफ घटाना नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच आसान करना, सप्लाई चेन लागत कम करना और निर्यात-आयात की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना भी हो सकता है।
अभी लागू क्यों नहीं होगा: कानूनी जांच और मंजूरियों की जरूरत
हालांकि बातचीत पूरी होने की खबर बड़ी है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक समझौता तभी लागू होगा जब कानूनी जांच (legal scrubbing) पूरी हो, दोनों पक्ष औपचारिक हस्ताक्षर करें और संबंधित संस्थागत मंजूरियां मिलें। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यूरोपीय संसद की मंजूरी जरूरी होगी, जबकि भारत में इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी लेनी होगी। यानी घोषणा के बाद भी लागू होने में समय लग सकता है।
‘मेक इन इंडिया’ और SMEs पर संभावित असर
रिपोर्ट में संकेत है कि यह समझौता भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा दे सकता है और यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। साथ ही, छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए यूरोपीय बाजारों में पहुंच के नए अवसर बन सकते हैं। टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं घटने पर उपभोक्ताओं को भी अधिक विकल्प और संभावित रूप से बेहतर कीमतें मिलने की चर्चा की गई है।
अगला चरण: किन संकेतों पर नजर रहे
- 27 जनवरी 2026 की प्रस्तावित घोषणा में किन सेक्टर्स/टैरिफ कटौती का उल्लेख होता है?
- कानूनी जांच और हस्ताक्षर की टाइमलाइन क्या रहती है?
- यूरोपीय संसद और भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी की प्रक्रिया कितनी तेज होती है?
- घरेलू उद्योगों और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा प्रावधान क्या तय होते हैं?
कुल मिलाकर, भारत-ईयू FTA वार्ता के पूरा होने की खबर आर्थिक और रणनीतिक—दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि घोषणा के बाद इसे किस गति से औपचारिक रूप दिया जाता है और समझौते के वास्तविक लाभ किन सेक्टर्स तक कितनी जल्दी पहुंचते हैं।