TV Price Hike: जनवरी 2026 से टीवी खरीदना पड़ सकता है महंगा, चिप किल्लत और रुपये की कमजोरी बनी वजह
NDTV के मुताबिक जनवरी 2026 से टीवी की कीमतें बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट में बताया गया कि GST में कटौती से मिली राहत के बावजूद मेमोरी चिप्स की कमी और रुपये की कमजोरी का असर कीमतों पर पड़ सकता है।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, अगर आप जनवरी 2026 में नया टीवी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपको ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जनवरी से टीवी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, और आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव जारी रहने की संभावना है।

रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार ने 32 इंच और उससे बड़े टीवी पर GST को 28% से घटाकर 18% करने का कदम उठाया था, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली। लेकिन NDTV के अनुसार, यह राहत लंबे समय तक टिकती नहीं दिख रही, क्योंकि लागत से जुड़े कई दबाव एक साथ बढ़ रहे हैं।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक टीवी की कीमतें बढ़ने के पीछे प्रमुख वजहों में मेमोरी चिप्स की किल्लत और रुपये की कमजोरी शामिल हैं। जब आयातित कंपोनेंट्स महंगे होते हैं या सप्लाई अनिश्चित हो जाती है, तो कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए लागत का असर ग्राहकों तक पास-ऑन करती हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को अपने प्रोडक्ट प्राइस में लागू कर सकती हैं। यानी, नए साल की शुरुआत में टीवी खरीदने वालों के लिए ‘डिस्काउंट’ और ‘टैक्स कट’ वाली खबर के साथ-साथ वास्तविक बाजार कीमतों का पहलू भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
NDTV ने काउंटरपॉइंट रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि 2025 की दूसरी तिमाही में भारत में स्मार्ट टीवी शिपमेंट में गिरावट देखी गई। ऐसी स्थिति में कंपनियों की रणनीति दो तरह की हो सकती है: कुछ मॉडल्स पर ऑफर देकर मांग बढ़ाना, और कुछ सेगमेंट में लागत बढ़ने पर कीमतें बढ़ा देना।
इस रिपोर्ट का व्यावहारिक मतलब यह है कि अगर आप टीवी खरीदने का समय तय कर रहे हैं, तो कीमतों की तुलना, पुराने स्टॉक की उपलब्धता, और ब्रांड्स के नए प्राइस लिस्ट अपडेट—इन बातों पर नजर रखना जरूरी होगा। कई बार जनवरी में नई कीमतें लागू होते ही पुराने रेट वाले मॉडल जल्दी आउट-ऑफ-स्टॉक भी हो जाते हैं।
कुल मिलाकर, NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 से टीवी की कीमतों पर ऊपर की तरफ दबाव बन सकता है—भले ही टैक्स में कटौती जैसे कदम मौजूद हों। ग्राहक के लिए सही डील तय करने में बाजार की सप्लाई-चेन और करेंसी ट्रेंड अब पहले से ज्यादा अहम हो गए हैं।