गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: लोकतंत्र, युवाशक्ति और ‘विकसित भारत 2047’ पर जोर
25 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस अतीत, वर्तमान और भविष्य की दिशा का मूल्यांकन करने का अवसर देता है। उन्होंने युवाओं, समावेशी विकास और आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए नागरिकों से एकजुटता और जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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25 जनवरी 2026 (रविवार) को 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देश की लोकतांत्रिक यात्रा, संविधान के मूल्यों और नागरिक भागीदारी को केंद्र में रखा। राष्ट्रपति ने कहा कि गणतंत्र दिवस ऐसा क्षण है जब हम देश की “पिछले, वर्तमान और भविष्य” की दिशा पर विचार कर सकते हैं—स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संवैधानिक शासन तक के बदलावों ने भारत को अपने राष्ट्रीय भाग्य का स्वयं निर्माता बनाया।

अपने संदेश में उन्होंने राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी) का संदर्भ देते हुए लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को जरूरी बताया। राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और समाज के विभिन्न वर्गों का सशक्तिकरण देश की प्रगति का “शक्तिशाली आयाम” है।
राष्ट्रपति ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी के साथ भारत के युवा उद्यमी, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और पेशेवर देश को नई ऊर्जा दे रहे हैं। उन्होंने ‘मेरा युवा भारत (MY Bharat)’ जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति और कार्यक्रमों को युवाओं की आकांक्षाओं से जोड़ने पर विकास को गति मिलेगी, और युवाशक्ति ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगी।
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत निरंतर आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रहा है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने गरीब-कल्याण और गरिमापूर्ण जीवन के लिए बुनियादी सुविधाओं को विस्तार देने वाले प्रयासों का उल्लेख किया—और इन्हें समावेशी विकास की दिशा में ठोस कदम बताया।
संबोधन का समग्र संदेश यह रहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि नागरिकों के साझा दायित्वों को याद करने का अवसर है। राष्ट्रपति ने आग्रह किया कि विविधता के बीच एकता, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा और समाज के हर वर्ग के अवसर-विस्तार के जरिए ही भारत अपनी अगली विकास-छलांग को टिकाऊ और न्यायपूर्ण बना सकता है।