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मनरेगा की जगह ‘VB-G RAM G’ पर सियासत तेज: मंत्री बोले—कम से कम एक-तिहाई रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित

नई ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G को लेकर बहस तेज है. ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना के तहत कम से कम एक-तिहाई लाभार्थी महिलाएं होंगी और काम गांवों की जरूरतों के हिसाब से तय किए जाएंगे.

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

क्या कहा गया

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-G RAM G) के बारे में कहा कि इसमें कम से कम एक-तिहाई रोजगार/लाभ महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे. बयान स्वयं-सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के संदर्भ में आया, जहां योजना की दिशा और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई.

मनरेगा की जगह ‘VB-G RAM G’ पर सियासत तेज: मंत्री बोले—कम से कम एक-तिहाई रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित
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मंत्री के अनुसार नई व्यवस्था में गांवों की जरूरतों और स्थानीय प्राथमिकताओं के मुताबिक कार्य चुने जाएंगे, ताकि रोजगार का असर केवल मजदूरी तक सीमित न रहे, बल्कि आजीविका और परिसंपत्तियों के निर्माण से भी जुड़ सके. सरकार का तर्क है कि कानून का ढांचा ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार सुरक्षा को मजबूत बनाने और प्रशासनिक स्तर पर क्रियान्वयन को अधिक लक्ष्य-आधारित बनाने पर केंद्रित होगा.

क्यों अहम है यह घोषणा

एक-तिहाई आरक्षण की बात ऐसे समय पर आई है जब मनरेगा के स्थान पर लाए जा रहे नए कानून को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव दिख रहा है. समर्थकों का कहना है कि महिलाओं की हिस्सेदारी तय करने से काम की उपलब्धता, भुगतान तक पहुंच और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका बढ़ेगी. आलोचकों की चिंता यह है कि नाम/ढांचे में बदलाव के साथ जमीनी स्तर पर अधिकारों, भुगतान की समयबद्धता और पारदर्शिता जैसी पुरानी चुनौतियां कैसे सुलझेंगी.

नीति के स्तर पर महिला आरक्षण का संकेत यह भी देता है कि योजना को केवल ‘काम के दिन’ नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन और श्रम भागीदारी बढ़ाने के औजार के रूप में पेश किया जा रहा है. हालांकि, असली परीक्षा नियमों (rules), राज्यों द्वारा समय पर अपनाने, डिजिटल हाजिरी/मस्टर रोल, शिकायत निवारण और फंड फ्लो जैसे क्रियान्वयन पहलुओं पर होगी.

आगे क्या देखना होगा

  • महिलाओं के लिए आरक्षण को कैसे मापा/लागू किया जाएगा—काम आवंटन, जॉब कार्ड, या भुगतान स्तर पर?
  • गांवों की प्राथमिकताओं के अनुसार काम तय करने की प्रक्रिया में ग्रामसभा/स्थानीय निकायों की भूमिका क्या होगी?
  • भुगतान और काम की मांग से जुड़ी समयसीमाएं किस तरह परिभाषित की जाएंगी, ताकि अधिकार व्यवहार में भी मजबूत हों?

समग्र रूप से, सरकार नई रोजगार गारंटी व्यवस्था को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ जोड़कर प्रस्तुत कर रही है, जबकि विपक्ष इसे मनरेगा की पहचान और उसके अधिकार-आधारित ढांचे पर असर के तौर पर देख रहा है. अगले कुछ महीनों में संसद, राज्यों और जमीनी क्रियान्वयन के संकेतों से स्पष्ट होगा कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार सुरक्षा को कितना बेहतर बनाता है.

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

  1. NDTV IndiaNDTV India