गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झलक, स्वदेशी हथियारों और वायुशक्ति का प्रदर्शन
77वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता से जीत’ थीम वाली ट्राई-सर्विसेज झांकी और फ्लाई-पास्ट ने ध्यान खींचा। परेड में राफेल, Su-30MKI, ध्रुव-प्रचंड हेलीकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और रोबोटिक डॉग्स तक दिखे।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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भारत ने सोमवार, 26 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस कर्तव्य पथ पर परेड और फ्लाई-पास्ट के साथ मनाया। इस बार समारोह का एक प्रमुख आकर्षण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में दिखाई गई झलक रही, जिसे ‘एकजुटता से जीत’ की थीम के साथ ट्राई-सर्विसेज प्रस्तुति में उभारा गया। मंच पर संदेश साफ था—सेना, नौसेना और वायुसेना की साझा क्षमता, समन्वय और त्वरित ऑपरेशनल प्रतिक्रिया को राष्ट्रीय ताकत के प्रतीक की तरह पेश किया गया।

झांकी और फ्लाई-पास्ट में क्या दिखा
रिपोर्ट के मुताबिक, परेड में वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा प्रदर्शित करते हुए फ्लाई-पास्ट किया। इसके साथ स्वदेशी टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां, मिसाइल सिस्टम और नई तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म्स की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही। कुछ हिस्सों में ड्रोन और रोबोटिक डॉग्स जैसी आधुनिक प्रणालियों की झलक भी दिखी—जो आने वाले युद्धक्षेत्रों की तकनीकी दिशा का संकेत देती है।
राफेल, Su-30MKI और स्वदेशी प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट के अनुसार, राफेल और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों ने हवाई ताकत का प्रदर्शन किया। साथ ही ‘ध्रुव’ और ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों का जिक्र भी हुआ। जमीन पर टी-90 भीष्म और अर्जुन जैसे टैंकों की चर्चा की गई, वहीं ब्रह्मोस और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम जैसी प्रणालियों का भी उल्लेख रहा। ऐसे दृश्य एक तरफ देश की तैनाती-तैयारी दिखाते हैं, दूसरी ओर ‘आत्मनिर्भर’ रक्षा उत्पादन की छवि मजबूत करते हैं।
समारोह का व्यापक संदेश
गणतंत्र दिवस परेड परंपरा और आधुनिकता का मिलन बनती रही है, लेकिन इस बार की प्रस्तुति में रणनीतिक संचार का पहलू ज्यादा साफ दिखा—सैनिक समन्वय, स्वदेशी क्षमता और बहु-आयामी ताकत (भूमि-आकाश-तकनीक) का संकेत। इससे घरेलू दर्शकों के लिए भरोसे का संदेश जाता है, और बाहरी दुनिया के लिए यह एक तरह का डिटरेंस-सिग्नल भी बन सकता है।
कुल मिलाकर, 26 जनवरी 2026 के इस आयोजन ने परेड को केवल औपचारिक परंपरा नहीं रहने दिया—बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के ‘शोकेस’ और सैन्य-तकनीकी आत्मविश्वास के मंच के रूप में भी प्रस्तुत किया।