DW की रिपोर्ट: ईरान में महंगाई और रियाल की गिरावट से तेज हुए विरोध, राजनीतिक असंतोष गहराया
ईरान में रियाल की तेज गिरावट और ऊंची महंगाई ने देशभर में विरोध प्रदर्शनों को फिर हवा दी है। विश्लेषकों के मुताबिक, आर्थिक दबाव अब सिर्फ रोज़मर्रा की दिक्कत नहीं रहा, बल्कि शासन के लिए राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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डॉयचे वेले (DW) की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जहां मुद्रा रियाल का मूल्य लगातार गिर रहा है और महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इसी पृष्ठभूमि में देश के अलग-अलग शहरों में विरोध प्रदर्शनों की एक नई लहर देखी गई, जो शुरुआत में आर्थिक दबाव से जुड़ी थी लेकिन धीरे-धीरे राजनीतिक असंतोष का संकेत भी देने लगी।

रिपोर्ट में बताया गया कि 28 दिसंबर को तेहरान में व्यापारियों की हड़ताल से शुरू हुए प्रदर्शन बाद में छात्रों और अन्य समूहों तक फैल गए। कई जगहों पर वायरल वीडियो में पुलिस कार्रवाई, आंसू गैस और प्रदर्शनकारियों की भीड़ का जिक्र किया गया। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी सिर्फ कीमतों और बेरोजगारी तक सीमित नहीं दिखी; इसमें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठे।
DW के अनुसार, जानकारों का मानना है कि ईरान में विरोध अक्सर ‘जीवनयापन’ की शिकायतों से शुरू होकर व्यापक मांगों में बदल जाते हैं। जब रोजमर्रा का खर्च बढ़ता है, लेकिन आय और नौकरी की सुरक्षा उसी गति से नहीं बढ़ती, तो गुस्सा आर्थिक से राजनीतिक बन सकता है। यह स्थिति शासन की विश्वसनीयता और संकट प्रबंधन क्षमता के लिए गंभीर चुनौती बन रही है।
रिपोर्ट में आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि रियाल एक डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंचने की बात सामने आई, वहीं महंगाई भी बहुत ऊंची बताई गई। कई परिवारों के लिए खाने-पीने जैसी बुनियादी जरूरतों का खर्च ही पूरे महीने के बजट पर भारी पड़ रहा है। कारोबारियों के लिए भी कीमतों और विनिमय दर की अनिश्चितता के बीच निर्णय लेना कठिन होता जा रहा है।
DW की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कुछ कदमों का संकेत दिया है। राष्ट्रपति ने केंद्रीय बैंक प्रमुख को बदलने और संवाद की बात कहने जैसे कदमों का जिक्र आया, जबकि सरकारी पक्ष ने महंगाई के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों और ‘आर्थिक युद्ध’ को भी जिम्मेदार ठहराया। मगर आलोचकों का कहना है कि सिर्फ तात्कालिक उपायों से गहरे असंतोष का समाधान नहीं होगा।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि अगर आर्थिक दबाव लंबे समय तक बना रहा तो आंदोलन सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर और व्यापक रूप ले सकता है। विपक्षी आवाजें और निर्वासन में रह रहे कुछ नेता मौजूदा हालात को शासन के लिए निर्णायक मोड़ के रूप में भी देख रहे हैं, हालांकि भविष्य किस दिशा में जाएगा, यह कई कारकों पर निर्भर रहेगा।
कुल मिलाकर, DW का आकलन यही है कि ईरान में आर्थिक संकट और सामाजिक तनाव एक-दूसरे को बढ़ा रहे हैं। रियाल की कमजोरी, ऊंची महंगाई, और भरोसे का संकट—ये तीनों मिलकर ऐसे हालात बना रहे हैं, जिनमें प्रदर्शन सिर्फ तात्कालिक नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक असर वाले बन सकते हैं।