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भारत-ईयू ‘ऐतिहासिक’ मुक्त व्यापार समझौता: करीब दो अरब लोगों का नया फ्री-ट्रेड ज़ोन

करीब दो दशक की बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौता तय कर लिया है। दोनों पक्ष इसे आर्थिक के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने वाला कदम बता रहे हैं।

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

क्या तय हुआ और क्यों अहम है

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अंतिम रूप से तय कर लिया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेर लाइएन ने इसे दो अरब लोगों का “फ्री-ट्रेड ज़ोन” बनाने वाला समझौता बताया, जिसका उद्देश्य व्यापार बढ़ाना और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देना है। रिपोर्टों के मुताबिक इस करार से दोनों पक्षों को बाज़ार तक बेहतर पहुंच, निवेश का भरोसा और सप्लाई-चेन सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है।

भारत-ईयू ‘ऐतिहासिक’ मुक्त व्यापार समझौता: करीब दो अरब लोगों का नया फ्री-ट्रेड ज़ोन
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अमेरिकी टैरिफ और भू-राजनीति का असर

डीडब्ल्यू की रिपोर्टिंग के अनुसार, हाल के वर्षों में वैश्विक व्यापार पर बढ़ते टैरिफ और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने EU और भारत—दोनों को साझेदारी तेज करने के लिए प्रेरित किया। भारत के कारोबारियों ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ जैसे झटकों के बाद यूरोपीय बाज़ार में अवसर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं EU भारत के साथ व्यापार व रक्षा संबंधों को मजबूत कर अमेरिका और चीन पर निर्भरता घटाने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहता है।

किस सेक्टर में क्या बदल सकता है

समझौते के संभावित असर में कई सेक्टर प्रमुख हैं—यूरोपीय कार उद्योग, टेक्नोलॉजी और उच्च-मूल्य मैन्युफैक्चरिंग को भारत में बेहतर पहुंच मिल सकती है, जबकि भारत के लिए टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य निर्यात क्षेत्रों में नए अवसर खुल सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि EU भारत की ऊंची आयात शुल्क व्यवस्था में कमी चाहता है, खासकर कारों और अल्कोहल जैसे उत्पादों पर, ताकि व्यापार अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।

अब आगे क्या

समझौते के बाद असली परीक्षा उसकी घरेलू मंज़ूरी प्रक्रियाओं और लागू होने की टाइमलाइन की होगी। डीडब्ल्यू की हिंदी रिपोर्टिंग के मुताबिक, EU में भी इसे संसद की मंज़ूरी की जरूरत पड़ सकती है और प्रक्रियात्मक रूप से पूरा लागू होने में समय लग सकता है। दोनों पक्ष अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि समझौता सिर्फ टैरिफ तक सीमित न रहे, बल्कि निवेश, सहयोगी मानक, सप्लाई-चेन और रणनीतिक साझेदारी तक फैल सके।

यह करार एक बड़े साझा बाज़ार की कल्पना पेश करता है—लेकिन फायदे का पैमाना इस पर निर्भर करेगा कि नियम, मंज़ूरी और सेक्टोरल बदलाव किस गति से होते हैं।

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

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