गणतंत्र दिवस 2026 से पहले कर्तव्य पथ पर ‘फुल ड्रेस रिहर्सल’: सैन्य ताकत और सांस्कृतिक झांकियों की झलक
नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस 2026 से पहले कर्तव्य पथ पर फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित हुई। रिहर्सल में परेड, सैन्य शक्ति प्रदर्शन और सांस्कृतिक झांकियों का पूर्वाभ्यास दिखा, जिसे राष्ट्रीय आयोजन की अंतिम तैयारियों का अहम हिस्सा माना जाता है।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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गणतंत्र दिवस 2026 से पहले नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित की गई। यह रिहर्सल 23 जनवरी 2026 को हुई बताई गई, जिसमें परेड के क्रम, सुरक्षा व्यवस्था, बैंड प्रदर्शन, और झांकियों की टाइमिंग जैसी बारीकियों का अभ्यास किया गया। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल को ‘फाइनल चेक’ की तरह देखा जाता है—जहां ग्राउंड-लेवल कोऑर्डिनेशन और समय-प्रबंधन की परीक्षा होती है।

रिहर्सल के दौरान भारत की सैन्य टुकड़ियों की मार्चिंग, हथियार प्रणालियों का डिस्प्ले, और विभिन्न राज्यों/विभागों की सांस्कृतिक झांकियों का पूर्वाभ्यास नजर आया। आमतौर पर इस अभ्यास का लक्ष्य यह होता है कि 26 जनवरी को होने वाली मुख्य परेड में किसी तरह की तकनीकी या लॉजिस्टिक कमी न रह जाए। इस बार भी कर्तव्य पथ पर अनुशासन, समन्वय और परेड की गति पर विशेष फोकस दिखा।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह आयोजन महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि गणतंत्र दिवस परेड भारत के संवैधानिक गणराज्य होने का सार्वजनिक प्रदर्शन है—जहां राज्य की औपचारिकता, राष्ट्रीय एकता और शक्ति-संतुलन का प्रतीकात्मक संदेश दिया जाता है। सरकार, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह आयोजन एक उच्च-सुरक्षा ‘नेशनल इवेंट’ होता है।
फुल ड्रेस रिहर्सल में भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक डायवर्जन, और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसी व्यवस्थाओं का अभ्यास शामिल रहता है। इस दौरान रूट पर तैनाती, मेडिकल सपोर्ट, और संचार समन्वय जैसी चीजें रियल-टाइम में टेस्ट की जाती हैं ताकि मुख्य दिन पर सब कुछ समय पर और सुरक्षित ढंग से हो।
दर्शकों के लिए अहम बातें
- मुख्य परेड के दिन निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी/मेट्रो एडवाइजरी देखना उपयोगी रहता है।
- सुरक्षा जांच के कारण समय से पहले पहुंचना जरूरी हो सकता है।
- पहचान पत्र/टिकटिंग नियमों और प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची का पालन करें।
- भीड़-भाड़ में बच्चों और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सावधानी रखें।
फुल ड्रेस रिहर्सल राष्ट्रीय आयोजन की ‘अंतिम रिहर्सल’ मानी जाती है—जहां परेड और सुरक्षा, दोनों की तैयारियां एक साथ परखी जाती हैं।