‘राजनीति में महिलाओं को पुरुषों से तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है’: जयपुर कार्यक्रम में वसुंधरा राजे का बयान
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि राजनीति में जगह बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने शिक्षा और आत्मनिर्भरता को महिलाओं की प्रगति की कुंजी बताया और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात कही।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों की तुलना में “तीन गुना” अधिक मेहनत करनी पड़ती है। राजे ने जोर देकर कहा कि शिक्षा महिलाओं की असली ताकत है और आत्मनिर्भरता से ही समानता का लक्ष्य व्यवहार में उतर सकता है। ([aajtak.in](https://www.aajtak.in/rajasthan/story/vasundhara-raje-women-politics-three-times-harder-jaipur-news-lclk-rptc-2447944-2026-01-24?utm_source=openai))

शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
राजे ने अपने संबोधन में महिलाओं के लिए शिक्षा को सफलता की सबसे मजबूत कुंजी बताया। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को कई स्तरों पर संघर्ष करना पड़ता है, इसलिए जरूरी है कि समाज और संस्थाएं महिला साक्षरता, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दें। ([aajtak.in](https://www.aajtak.in/rajasthan/story/vasundhara-raje-women-politics-three-times-harder-jaipur-news-lclk-rptc-2447944-2026-01-24?utm_source=openai))
प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत
उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों में महिला साक्षरता और भागीदारी में सुधार हुआ है, लेकिन संसद और राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी पर्याप्त नहीं है। राजे ने संकेत दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब आधी आबादी की भागीदारी सत्ता और निर्णय-निर्माण में भी समान रूप से दिखाई दे। ([aajtak.in](https://www.aajtak.in/rajasthan/story/vasundhara-raje-women-politics-three-times-harder-jaipur-news-lclk-rptc-2447944-2026-01-24?utm_source=openai))
क्यों यह बयान अहम है
यह टिप्पणी ऐसे समय आती है जब देशभर में चुनावी राजनीति में महिला मतदाताओं और महिला नेतृत्व की भूमिका लगातार चर्चा में है। राजे का बयान राजनीतिक दलों और समाज, दोनों के लिए यह याद दिलाता है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि अवसरों, संसाधनों और सुरक्षा-समानता से भी जुड़ा है।
आगे की बहस इसी बिंदु पर टिकती है कि महिलाओं को मैदान में उतरने के लिए बराबरी के अवसर कैसे मिलें—पार्टी टिकट, संगठनात्मक ढांचा, संसाधन और सुरक्षित सार्वजनिक स्पेस, सभी स्तरों पर।