ताजमहल परिसर में तिरंगा फहराने का दावा: हिंदू महासभा के वीडियो के बाद प्रशासन में हलचल, ASI-CISF की सख्ती
आगरा में गणतंत्र दिवस पर अखिल भारत हिंदू महासभा ने ताजमहल परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का दावा किया। वीडियो सामने आने के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई और CCTV फुटेज खंगाले जाने की बात कही गई।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी 2026 को आगरा के ताजमहल परिसर को लेकर एक नई बहस छिड़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक अखिल भारत हिंदू महासभा ने दावा किया कि उसने ताजमहल परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कथित तौर पर संगठन के पदाधिकारी तिरंगा फहराते दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ी और सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी भी तेज हुई।

क्या है संगठन का दावा और वीडियो में क्या दिखता है
रिपोर्ट के अनुसार महासभा के लोगों ने ताजमहल परिसर में तिरंगा फहराने के दौरान ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए और राष्ट्रीय गान भी गाया। संगठन ने यह भी दावा दोहराया कि ताजमहल ‘तेजोमहालय’ है—यह दावा इससे पहले भी सार्वजनिक बहस और राजनीतिक विवाद का विषय रहा है। इस बार घटना के साथ वीडियो सामने आने से मामला अधिक संवेदनशील बन गया है।
सुरक्षा और नियमों का पहलू: ASI और CISF की भूमिका
ताजमहल एक संरक्षित स्मारक है और यहां गतिविधियां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत होती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ASI और CISF के जवानों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर यह जांच भी अहम होती है कि प्रवेश, गतिविधि और रिकॉर्डिंग/प्रचार से जुड़े नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
पहले भी रहे हैं विवाद: स्मारक के भीतर धार्मिक/प्रतीकात्मक गतिविधियां
रिपोर्ट के मुताबिक ताजमहल परिसर को लेकर पहले भी नमाज, हनुमान चालीसा पाठ और भगवा झंडा फहराने जैसे विवाद सामने आ चुके हैं। इसलिए इस बार का घटनाक्रम भी केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का रूप ले सकता है। इसके पीछे कारण यह है कि स्मारकों की ‘ऐतिहासिक पहचान’, ‘धार्मिक प्रतीक’ और ‘राष्ट्रीय प्रतीक’—तीनों का मिश्रण अक्सर टकराव पैदा करता है।
इस मामले में आगे क्या देखना होगा
- वीडियो की लोकेशन/समय और घटना की सत्यता को लेकर आधिकारिक पुष्टि क्या होती है?
- ASI/CISF जांच में नियम उल्लंघन पाए जाने पर क्या कार्रवाई होती है?
- स्थानीय प्रशासन सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई बदलाव या अतिरिक्त प्रतिबंध लागू करता है या नहीं?
- घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है और क्या यह कानूनी विवाद बनता है?
कुल मिलाकर, ताजमहल परिसर में तिरंगा फहराने के दावे ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि संरक्षित स्मारकों में प्रतीकात्मक गतिविधियों की सीमा क्या होनी चाहिए। जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।