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ट्रेड डील के बाद अमेरिका जा रहे जयशंकर: 4 फरवरी को क्रिटिकल मिनरल्स बैठक, सप्लाई‑चेन पर फोकस

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अगले हफ्ते वॉशिंगटन डीसी जाने की खबर है। एजेंडे में 4 फरवरी को अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट में क्रिटिकल मिनरल्स पर हाई‑लेवल बैठक और संभावित द्विपक्षीय बातचीत शामिल बताई गई।

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

भारत‑EU ट्रेड डील के बाद कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। खबर के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले हफ्ते वॉशिंगटन डीसी के दौरे पर जा सकते हैं। वहां वे ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ पर आयोजित एक हाई‑लेवल बैठक में हिस्सा लेने वाले हैं, जो 4 फरवरी 2026 को अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट में होने की बात कही गई। बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा किए जाने का जिक्र भी किया गया है। ([aajtak.in](https://www.aajtak.in/india/news/story/aaj-ki-taza-khabar-28-january-2026-evening-top-news-headlines-ntc-dskc-2451476-2026-01-28?utm_source=openai))

ट्रेड डील के बाद अमेरिका जा रहे जयशंकर: 4 फरवरी को क्रिटिकल मिनरल्स बैठक, सप्लाई‑चेन पर फोकस
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क्रिटिकल मिनरल्स—जैसे रेयर अर्थ, बैटरी‑ग्रेड धातुएं और अन्य रणनीतिक खनिज—आधुनिक उद्योग, रक्षा, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा परिवर्तन (EV/ग्रीन एनर्जी) के लिए निर्णायक माने जाते हैं। इसी वजह से देशों का जोर सप्लाई‑चेन को सुरक्षित करने, भरोसेमंद साझेदारों के साथ सोर्सिंग बढ़ाने और प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने पर है। इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की संभावित भागीदारी को भारत की रणनीतिक‑आर्थिक प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि जयशंकर को 4‑5 फरवरी 2026 के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बैठक के सिलसिले में वॉशिंगटन आमंत्रित किया गया है, और यदि यात्रा होती है तो अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो से मुलाकात की संभावना भी बताई गई है। ([hindustantimes.com](https://www.hindustantimes.com/india-news/jaishankar-invited-to-us-for-key-minerals-meet-in-feb-101769023618293.html?utm_source=openai))

यह दौरा ऐसे समय में चर्चा में है जब वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति पर प्रतिस्पर्धा और भू‑राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। भारत के लिए यह मंच निवेश, तकनीकी साझेदारी, रिफाइनिंग/प्रोसेसिंग और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों पर बातचीत की दिशा में उपयोगी हो सकता है।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यात्रा के दौरान किन देशों/समूहों के साथ भारत कौन‑से ठोस समझौते या संयुक्त पहल आगे बढ़ाता है, और क्या इसे व्यापार व उद्योग नीति के साथ जोड़कर नई घोषणा की जाती है।

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