युवाओं में हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा: 5 आदतें जो दिल को समय से पहले ‘बूढ़ा’ कर रही हैं
एक हेल्थ-सेगमेंट में विशेषज्ञ ने बताया कि 20-25 साल के युवाओं में दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं और कुछ आदतें हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
- रिपोर्ट
- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
- प्रकाशित
कम उम्र, बड़ा जोखिम: क्यों चिंता बढ़ रही है
भारत में हार्ट अटैक और हृदय रोग अब केवल ज्यादा उम्र की समस्या नहीं माने जा रहे। रिपोर्ट के मुताबिक एक हेल्थ-सेगमेंट में विशेषज्ञ ने बताया कि 20-25 साल के युवाओं में दिल से जुड़ी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं। यह ट्रेंड इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह जीवनशैली, तनाव, नींद और खानपान जैसी चीजों के साथ सीधे जुड़ा दिखता है।

कौन-सी आदतें बढ़ाती हैं खतरा?
सेगमेंट के मुताबिक कुछ रोजमर्रा की आदतें दिल पर लगातार दबाव बढ़ाती हैं और लंबे समय में जोखिम को बढ़ा सकती हैं। यहां संदेश यह है कि बीमारी अचानक दिखती है, लेकिन उसका ‘बिल्ड-अप’ अक्सर सालों में होता है—और वही बिल्ड-अप अब युवाओं में जल्दी शुरू हो रहा है।
- अनियमित नींद और देर रात तक जागना, जिससे रिकवरी और हार्मोनल बैलेंस प्रभावित होता है
- लगातार तनाव और ‘हाई स्ट्रेस’ दिनचर्या, जो ब्लड प्रेशर और हार्ट-लोड बढ़ा सकती है
- जंक/अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय, जो वजन और मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ाते हैं
- शारीरिक गतिविधि की कमी (सेडेंटरी लाइफ), जिससे कार्डियो फिटनेस घटती है
- धूम्रपान/वेपिंग या तंबाकू का सेवन, जो हृदय और रक्तवाहिनियों को नुकसान पहुंचाता है
रोकथाम की दिशा: ‘बेसिक्स’ पर लौटना
इस तरह की रिपोर्टिंग का मुख्य संदेश यही है कि युवाओं के लिए रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका जटिल नहीं, बल्कि लगातार निभाए जाने वाले सरल बदलाव हैं—जैसे नियमित नींद, संतुलित भोजन, रोजाना चलना/व्यायाम, तनाव प्रबंधन, और तंबाकू से दूरी।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर सीने में दबाव/दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान, चक्कर या तेज धड़कन जैसी शिकायतें हों—खासकर परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास हो—तो स्क्रीनिंग और डॉक्टर की सलाह को टालना नहीं चाहिए। समय पर जांच से जोखिम का आकलन और नियंत्रण आसान हो सकता है।