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स्वास्थ्य

बिहार: प्रसव से पहले नवजात की मौत, रेफर के दौरान प्रसूता की भी मौत; स्वास्थ्य तंत्र पर लापरवाही के आरोप

बिहार के सारण जिले में एक निजी नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी अस्पताल से महिला को निजी क्लीनिक की ओर मोड़ा गया, जहां जरूरी आपात सुविधाएं और योग्य चिकित्सक नहीं थे। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा इलाके से प्रसव से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक निजी नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान पहले नवजात की मौत हुई और बाद में रेफर किए जाने के दौरान प्रसूता ने भी दम तोड़ दिया। घटना के बाद स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र की आपात तैयारियों, रेफरल प्रणाली और निजी क्लीनिकों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ([amarujala.com](https://www.amarujala.com/live/bihar/bihar-latest-and-breaking-news-today-in-hindi-live-aaj-ke-taaja-samachar-2026-01-25?utm_source=openai))

बिहार: प्रसव से पहले नवजात की मौत, रेफर के दौरान प्रसूता की भी मौत; स्वास्थ्य तंत्र पर लापरवाही के आरोप
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क्या आरोप लगाए गए

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अस्पताल से महिला को निजी क्लीनिक की ओर मोड़ा गया, जहां न तो योग्य चिकित्सक मौजूद थे और न ही जरूरी इमरजेंसी सुविधाएं। ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ देखभाल, ब्लड बैंक/आईसीयू सपोर्ट और एम्बुलेंस-रेफरल की उपलब्धता जीवन और मृत्यु के बीच फर्क बन जाती है। ([amarujala.com](https://www.amarujala.com/live/bihar/bihar-latest-and-breaking-news-today-in-hindi-live-aaj-ke-taaja-samachar-2026-01-25?utm_source=openai))

रेफरल देरी क्यों जानलेवा होती है

प्रसव के दौरान जटिलताएं तेजी से बढ़ सकती हैं—अत्यधिक रक्तस्राव, भ्रूण संकट, उच्च रक्तचाप या संक्रमण जैसी स्थितियां मिनटों में बिगड़ती हैं। इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/निजी नर्सिंग होम से उच्च केंद्र तक ‘टाइम-टू-ट्रीटमेंट’ कम होना बेहद जरूरी है। इस घटना में रेफर के दौरान मौत की बात सामने आना इसी जोखिम को रेखांकित करता है। ([amarujala.com](https://www.amarujala.com/live/bihar/bihar-latest-and-breaking-news-today-in-hindi-live-aaj-ke-taaja-samachar-2026-01-25?utm_source=openai))

परिवारों के लिए जरूरी सावधानियां (जानकारी हेतु)

  • प्रसव के लिए ऐसी सुविधा चुनें जहां 24x7 डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और इमरजेंसी सपोर्ट मौजूद हो।
  • यदि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी हो (बीपी, शुगर, पहले ऑपरेशन आदि), तो पहले से ही उच्च केंद्र तय रखें।
  • रेफरल की स्थिति में एम्बुलेंस, दस्तावेज और निकटतम सरकारी/मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल का प्लान तैयार रखें।
  • सरकारी योजनाओं/हेल्पलाइन और जिला अस्पताल के मातृ-शिशु विभाग की जानकारी पहले से नोट कर लें।
  • लक्षण बिगड़ने पर देर न करें—ब्लीडिंग, बेहोशी, तेज बुखार, सांस में दिक्कत जैसे संकेत आपात स्थिति हैं।

यह मामला बताता है कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य में केवल इलाज नहीं, समय पर सही जगह इलाज सबसे बड़ी जरूरत है—और सिस्टम की हर कड़ी (रेफरल, स्टाफ, इमरजेंसी सुविधाएं) मजबूत होना जरूरी है। ([amarujala.com](https://www.amarujala.com/live/bihar/bihar-latest-and-breaking-news-today-in-hindi-live-aaj-ke-taaja-samachar-2026-01-25?utm_source=openai))

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

  1. Amar UjalaAmar Ujala