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स्वास्थ्य

दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक बंद होने की आशंका: हजारों संविदा नौकरियों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पर दबाव

डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक बंद होने की स्थिति में कई कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि कई नियुक्तियां 2026 तक कॉन्ट्रैक्ट पर हैं और कर्मचारियों ने स्वास्थ्य बीमा व मातृत्व लाभ जैसी सुविधाओं की कमी की भी बात कही है.

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

दिल्ली की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था में ‘मोहल्ला क्लीनिक’ मॉडल लंबे समय से एक प्रमुख नीति-चर्चा का विषय रहा है. डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, इन क्लीनिकों के बंद होने की आशंका के बीच हजारों संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में बताई जा रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई कर्मचारियों की नियुक्ति 2026 तक कॉन्ट्रैक्ट पर है—ऐसे में अनिश्चितता सीधे उनकी आजीविका और मरीजों की पहुंच दोनों पर असर डालती है.

दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक बंद होने की आशंका: हजारों संविदा नौकरियों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पर दबाव
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रिपोर्ट के अनुसार, मोहल्ला क्लीनिक में भुगतान का ढांचा ‘प्रति दिन/प्रति मरीज’ प्रकृति का है: डॉक्टर (मेडिकल ऑफिसर), मल्टी-पर्पस वर्कर, फार्मासिस्ट और मेडिकल सहायक—सभी का भुगतान अलग दरों पर होता है. साथ ही, एक दिन में अधिकतम मरीज देखने की सीमा का जिक्र भी रिपोर्ट में है, जो सेवा-क्षमता और कमाई—दोनों को प्रभावित कर सकती है.

कर्मचारियों ने डीडब्ल्यू को बताया कि उन्हें स्वास्थ्य बीमा या मैटरनिटी बेनिफिट जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं. यह बिंदु बताता है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की ‘फ्रंटलाइन’ पर काम करने वालों के लिए सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न कितना महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब नौकरी की प्रकृति अस्थायी और भुगतान प्रदर्शन/गिनती से जुड़ा हो.

मरीजों के लिए मोहल्ला क्लीनिक का महत्व अक्सर दूरी, कतार, और बेसिक दवाओं/जांच तक त्वरित पहुंच से जुड़ा रहता है. अगर क्लीनिकों की संख्या घटती है या संचालन बाधित होता है, तो नजदीकी विकल्पों पर भार बढ़ सकता है—जिसका दबाव बड़े सरकारी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों दोनों पर पड़ना स्वाभाविक है.

नीति-स्तर पर बहस का केंद्रीय सवाल यही रहेगा कि संक्रमण अवधि में मरीजों की निरंतर सेवा कैसे सुनिश्चित होगी और कर्मचारियों के लिए रोजगार-सुरक्षा तथा बुनियादी लाभ कैसे तय किए जाएंगे. फिलहाल, रिपोर्ट के संकेत बताते हैं कि यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक बदलाव का नहीं, बल्कि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य मॉडल की दिशा तय करने का भी है.

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

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