WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का एपिडेमियोलॉजिकल बुलेटिन (14 जनवरी 2026): प्रमुख संक्रामक रोगों पर अपडेट, भारत (पश्चिम बंगाल) में निपाह का उल्लेख
WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के 14 जनवरी 2026 के बुलेटिन में 29 दिसंबर 2025 से 11 जनवरी 2026 की अवधि के लिए प्रमुख संक्रामक रोगों और निगरानी/जोखिम-आकलन से जुड़े बिंदुओं का सार दिया गया है। इसमें भारत (पश्चिम बंगाल) में निपाह संक्रमण का उल्लेख भी शामिल है।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय ने 14 जनवरी 2026 को अपना एपिडेमियोलॉजिकल बुलेटिन (01st edition) प्रकाशित किया, जिसकी रिपोर्टिंग अवधि 29 दिसंबर 2025 से 11 जनवरी 2026 बताई गई है। यह बुलेटिन क्षेत्र में प्रमुख संक्रामक रोगों की स्थिति का सार प्रस्तुत करता है ताकि जोखिम-आकलन और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया (response) को दिशा मिल सके। ([who.int](https://www.who.int/publications/i/item/9789290222293?utm_source=openai))

बुलेटिन में प्रमुख हाइलाइट्स क्या हैं
WHO के पेज पर दिए गए ‘Key highlights’ के अनुसार इस संस्करण में भारत (पश्चिम बंगाल) में निपाह वायरस संक्रमण का उल्लेख, इन्फ्लुएंजा महामारी के दौरान निगरानी/मॉनिटरिंग पर सार्वजनिक टिप्पणी के लिए कॉल, और इन्फ्लुएंजा A(H5) वैक्सीन उपयोग पर नई गाइडेंस जैसी बातें शामिल हैं। इसके अलावा COVID-19, इन्फ्लुएंजा, एमपॉक्स, डेंगू जैसे विषयों का भी संदर्भ दिया गया है। ([who.int](https://www.who.int/publications/i/item/9789290222293?utm_source=openai))
निपाह का उल्लेख क्यों महत्वपूर्ण
निपाह वायरस एक उच्च-जोखिम (high consequence) ज़ूनोटिक बीमारी मानी जाती है, इसलिए किसी भी क्षेत्र/राज्य में इसके संदर्भ का सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व बढ़ जाता है। बुलेटिन में ‘India (West Bengal): Nipah virus infection’ का उल्लेख यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय निगरानी फ्रेमवर्क में इस पर ध्यान रखा जा रहा है और जोखिम-आकलन के लिए इसे ट्रैक किया जा रहा है। ([who.int](https://www.who.int/publications/i/item/9789290222293?utm_source=openai))
आम नागरिकों के लिए व्यावहारिक संदेश
- सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह/एडवाइजरी के लिए राज्य/केंद्र की आधिकारिक स्वास्थ्य एजेंसियों के अपडेट फॉलो करें।
- बुखार/श्वसन या न्यूरोलॉजिकल लक्षणों के क्लस्टर की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।
- स्वास्थ्य-प्रणाली स्तर पर निगरानी (surveillance) और जोखिम-संचार (risk communication) की भूमिका सबसे अहम रहती है।
यह बुलेटिन एक क्षेत्रीय ‘सिचुएशन स्नैपशॉट’ की तरह है—जिसका उद्देश्य ट्रेंड्स, जोखिम और प्रतिक्रिया-जरूरतों की पहचान को आसान बनाना है। ([who.int](https://www.who.int/publications/i/item/9789290222293?utm_source=openai))