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स्वास्थ्य

अध्ययन: प्लास्टिक के जीवन-चक्र से होने वाले उत्सर्जन 2040 तक स्वास्थ्य नुकसान दोगुना कर सकते हैं

डीडब्ल्यू के अनुसार एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक के पूरे जीवन-चक्र (तेल-गैस से लेकर उत्पादन, ट्रांसपोर्ट, रीसाइक्लिंग और निपटान तक) से निकले उत्सर्जन मानव स्वास्थ्य पर होने वाले नुकसान को 2040 तक दोगुने से ज्यादा कर सकते हैं।

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

लिटर नहीं, उत्सर्जन मुख्य समस्या

डीडब्ल्यू की रिपोर्टिंग के मुताबिक यह चेतावनी प्लास्टिक कचरे या माइक्रोप्लास्टिक तक सीमित नहीं है। अध्ययन का फोकस प्लास्टिक के पूरे जीवन-चक्र में निकलने वाले उत्सर्जन पर है—फॉसिल फ्यूल (तेल/गैस) के उत्खनन से लेकर निर्माण, परिवहन, रीसाइक्लिंग और निपटान तक। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में बनने वाले प्लास्टिक का बड़ा हिस्सा (लगभग 99%) फॉसिल फ्यूल से ही तैयार होता है, इसलिए इसके साथ प्रदूषण का बोझ भी जुड़ा रहता है।

अध्ययन: प्लास्टिक के जीवन-चक्र से होने वाले उत्सर्जन 2040 तक स्वास्थ्य नुकसान दोगुना कर सकते हैं
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स्वास्थ्य पर नुकसान कैसे मापा गया

डीडब्ल्यू के अनुसार अध्ययन (The Lancet Planetary Health में प्रकाशित) ने ‘डिसएबिलिटी-एडजस्टेड लाइफ ईयर्स’ (DALYs) के जरिए अनुमान लगाया कि प्लास्टिक-लाइफसाइकिल उत्सर्जन से कितने ‘स्वस्थ’ साल खोए जा सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि 2016 को आधार वर्ष मानते हुए, उस साल दुनिया भर में लगभग 2.1 मिलियन स्वस्थ जीवन-वर्ष खोने का अनुमान लगाया गया।

2040 तक क्या हो सकता है

रिपोर्ट के मुताबिक ‘बिज़नेस-एज़-यूज़ुअल’ स्थिति में—जहां उत्पादन और प्रबंधन में बड़े बदलाव नहीं होते—2040 में वार्षिक स्वास्थ्य-हानि 4.5 मिलियन DALYs से अधिक हो सकती है, यानी 2016 की तुलना में दोगुने से ज्यादा। अध्ययन ने अलग-अलग परिदृश्यों (scenarios) का मॉडलिंग कर यह दिखाने की कोशिश की कि प्लास्टिक उपयोग घटाने, रीसाइक्लिंग बढ़ाने और वेस्ट मैनेजमेंट सुधारने पर भी स्वास्थ्य बोझ पूरी तरह खत्म नहीं होता।

किस तरह की बीमारियों/जोखिमों से संबंध

डीडब्ल्यू रिपोर्ट बताती है कि प्लास्टिक जीवन-चक्र से जुड़े प्रदूषक सीधे तौर पर (जैसे सूक्ष्म कण/फाइन पार्टिकुलेट मैटर से श्वसन और हृदय रोग का जोखिम) और परोक्ष रूप से (जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी स्वास्थ्य मार्फत) नुकसान पहुंचा सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ संभावित जोखिमों—जैसे माइक्रो/नैनोप्लास्टिक्स के प्रभाव—को पर्याप्त वैश्विक डेटा की कमी के कारण अध्ययन में शामिल नहीं किया जा सका।

प्लास्टिक की ‘सुविधा’ के पीछे छिपी लागत—स्वास्थ्य, हवा और जलवायु—अब अधिक स्पष्ट होकर सामने आ रही है।

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

  1. DWDW