बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और सांस संबंधी दिक्कतों का बढ़ता जोखिम: डॉक्टर क्या सलाह देते हैं
ठंड, बारिश और तेज हवा के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव से सर्दी-खांसी, अस्थमा/एलर्जी और वायरल संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। सावधानी, साफ-सफाई और समय पर इलाज से दिक्कतें कम की जा सकती हैं।
- रिपोर्ट
- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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27 जनवरी 2026 के आसपास कई राज्यों में बारिश, तेज हवा और ठंड की स्थिति की खबरों के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञ आम तौर पर इस तरह के मौसम में सावधानी बढ़ाने की सलाह देते हैं। तापमान में अचानक गिरावट, नमी बढ़ना और ठंडी हवा के संपर्क में बार-बार आना—इन सबका असर श्वसन तंत्र पर पड़ सकता है। ऐसे समय में सर्दी-खांसी, गले में खराश, वायरल फीवर, एलर्जी और अस्थमा/सीओपीडी जैसी स्थितियों वाले मरीजों में लक्षण बढ़ने का जोखिम रहता है।

कौन लोग ज्यादा सतर्क रहें
- बुजुर्ग और छोटे बच्चे, जिनकी इम्युनिटी अपेक्षाकृत संवेदनशील होती है
- अस्थमा/एलर्जी/सीओपीडी के मरीज
- दिल के मरीज, जिन्हें ठंड में ब्लड प्रेशर और सांस की तकलीफ बढ़ सकती है
- बाहर लंबे समय तक काम करने वाले लोग (डिलीवरी/निर्माण/सुरक्षा कर्मी)
घर और बाहर—व्यावहारिक सावधानियां
मौसम बदलने पर शरीर का तापमान स्थिर रखना महत्वपूर्ण है। बाहर निकलते समय परतदार कपड़े, स्कार्फ/मफलर, और जरूरत हो तो रेन-प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें। भीगने के बाद कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को गर्म रखें। हाथ धोने की आदत, खांसते/छींकते समय मुंह ढकना, और भीड़भाड़ वाली जगहों में अनावश्यक समय न बिताना वायरल संक्रमण के जोखिम को घटाता है।
खानपान और हाइड्रेशन
ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन पर्याप्त पानी/गर्म तरल (सूप, गुनगुना पानी) लेते रहना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि इम्युनिटी सपोर्ट कर सकती है। धूम्रपान से परहेज और घर में वेंटिलेशन बनाए रखना भी सांस संबंधी लक्षणों के लिए फायदेमंद है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें
- तेज बुखार 2-3 दिन से अधिक रहे
- सांस लेने में तकलीफ/सीने में जकड़न बढ़े
- बच्चों में सुस्ती, तेज सांस या पानी कम पीना दिखे
- अस्थमा मरीजों में रेस्क्यू इनहेलर की जरूरत बढ़ जाए
नोट: यह सामान्य जानकारी है। किसी भी गंभीर या बिगड़ते लक्षण की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।