लैंसेट आयोग की रिपोर्ट: भारत में ‘नागरिक-केंद्रित’ स्वास्थ्य प्रणाली का रोडमैप, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर फोकस
इंडिया टुडे के मुताबिक लैंसेट आयोग की ‘Citizen-Centred Health System for India’ रिपोर्ट 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में लॉन्च हुई। रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, भरोसेमंद और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप बनाने का रोडमैप दिया गया है और UHC के लिए सार्वजनिक वित्तपोषण व एकीकृत सेवा-श्रृंखला पर जोर है।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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लैंसेट आयोग की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट ‘Citizen-Centred Health System for India’ 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में लॉन्च की गई। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस रिपोर्ट का उद्देश्य भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को इस तरह रूपांतरित करने का रोडमैप देना है कि सेवाएं अधिक सुलभ, भरोसेमंद और नागरिकों की वास्तविक जरूरतों के प्रति उत्तरदायी बन सकें—खासकर तब जब देश सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि नागरिकों को अक्सर बिखरी हुई सेवाओं के बीच रास्ता निकालना पड़ता है, जिससे खर्च और असमानताएं बढ़ती हैं। आयोग का दृष्टिकोण यह है कि योजना और डिलीवरी के केंद्र में नागरिक अनुभव को रखा जाए, ताकि लोगों को अलग-अलग स्तर की सुविधाओं के लिए बार-बार भटकना न पड़े और इलाज की निरंतरता बने।
रिपोर्ट में सुझाए गए सुधार (सार)
- UHC की रीढ़ के रूप में सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित और सार्वजनिक रूप से प्रदान की गई स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना
- प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शियरी सेवाओं को ‘इंटीग्रेटेड कंटिन्यूम’ की तरह जोड़ना
- संसाधनों के उपयोग में दक्षता बढ़ाना और देखभाल के विखंडन को कम करना
इंडिया टुडे के मुताबिक आयोग ने कई वर्षों के काम और राज्यों में बड़े घरेलू सर्वेक्षण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि सिस्टम को नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए केवल नई योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि सेवा-डिजाइन और जवाबदेही की संरचना में भी बदलाव की जरूरत है।
इस तरह की रिपोर्टें नीति स्तर पर इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे स्वास्थ्य निवेश की प्राथमिकताओं, प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती, रेफरल सिस्टम, और सार्वजनिक-निजी संतुलन जैसे सवालों पर दिशा देती हैं। अगले चरण में यह देखा जाना अहम होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें इन सिफारिशों को बजट, संस्थागत सुधार और सेवा मानकों में किस तरह उतारती हैं।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट का संदेश यही है कि भारत का स्वास्थ्य तंत्र केवल इलाज उपलब्ध कराने तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिकों के लिए भरोसेमंद, समयबद्ध और एकीकृत सेवाओं की गारंटी देने वाली व्यवस्था बने।