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स्टार्टअप हायरिंग में ‘नेटीव-लैंग्वेज’ AI का बढ़ता इस्तेमाल: वॉइसबॉट से इंटरव्यू, समय-सीमा में कटौती का दावा

कई भारतीय स्टार्टअप फ्रंटलाइन और कस्टमर-फेसिंग भूमिकाओं के लिए स्थानीय भाषाओं में AI वॉइसबॉट का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार इससे भर्ती प्रक्रिया तेज हुई और भाषा बाधा कम हुई।

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

भारत में भर्ती का बड़ा हिस्सा ऐसे रोल्स का है जहां उम्मीदवारों के लिए अंग्रेज़ी में सहज होना जरूरी नहीं, लेकिन पारंपरिक इंटरव्यू सिस्टम अक्सर उसी दिशा में झुक जाता है। 25 दिसंबर 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब कई स्टार्टअप ‘नेटीव-लैंग्वेज’ AI वॉइसबॉट के जरिए शुरुआती इंटरव्यू/स्क्रीनिंग कर रहे हैं। बताया गया कि ये वॉइसबॉट हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली जैसी भाषाओं में उम्मीदवारों से बातचीत कर सकते हैं—जिससे उम्मीदवार ज्यादा सहज महसूस करते हैं और भर्ती टीम पर मैनुअल काम का दबाव घटता है।

स्टार्टअप हायरिंग में ‘नेटीव-लैंग्वेज’ AI का बढ़ता इस्तेमाल: वॉइसबॉट से इंटरव्यू, समय-सीमा में कटौती का दावा
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क्या बदल रहा है: ‘English barrier’ से ‘comfort-first’ मॉडल

रिपोर्ट बताती है कि क्लाउड किचन, लोन/फिनटेक, और जॉब/लोकल-हायरिंग प्लेटफॉर्म जैसे सेक्टरों में ऐसे रोल्स की संख्या ज्यादा है जहां कम्युनिकेशन जरूरी है, लेकिन अंग्रेज़ी अनिवार्य नहीं। वॉइसबॉट स्थानीय भाषा में प्रश्न पूछकर उम्मीदवार की उपलब्धता, बेसिक स्किल्स, लोकेशन, शिफ्ट-फिट, और भूमिका के लिए न्यूनतम योग्यता जैसी जानकारी संरचित तरीके से जुटा सकते हैं। इससे स्क्रीनिंग का समय घटने और हायरिंग टाइमलाइन तेज होने का दावा किया गया है।

कंपनियों को फायदा: गति, स्केल और लागत नियंत्रण

हाई-वॉल्यूम हायरिंग में सबसे बड़ी समस्या ‘स्केल’ है—हजारों आवेदनों में से सही उम्मीदवार तक जल्दी पहुंचना। AI वॉइसबॉट 24x7 स्क्रीनिंग कर सकते हैं, दोहराए जाने वाले सवालों को मानकीकृत कर सकते हैं और रिक्रूटर्स के लिए शॉर्टलिस्ट तैयार कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मामलों में समय-सीमा घटने और रिक्रूटर वर्कलोड कम होने की बात कही गई।

उम्मीदवार के लिए क्या बदलता है

  • स्थानीय भाषा में जवाब देने से घबराहट और हिचकिचाहट घट सकती है
  • इंटरव्यू शेड्यूलिंग में लचीलापन (कॉल/वॉइसबॉट किसी भी समय)
  • शुरुआती स्क्रीनिंग में पक्षपात/भेदभाव के कुछ रूप कम होने की संभावना, लेकिन मॉडल-डिज़ाइन पर निर्भर

जोखिम और सावधानियाँ: डेटा, पारदर्शिता और निष्पक्षता

AI आधारित हायरिंग में डेटा प्राइवेसी, रिकॉर्डिंग/कंसेंट, और एल्गोरिद्मिक बायस जैसे मुद्दे भी अहम हैं। अगर वॉइस डेटा या ट्रांसक्रिप्ट स्टोर होते हैं तो उम्मीदवार को स्पष्ट जानकारी और विकल्प मिलना चाहिए। इसी तरह, वॉइस/एक्सेंट/बोलने की गति के आधार पर गलत निष्कर्ष न निकले—इसके लिए लगातार ऑडिट और ह्यूमन ओवरसाइट जरूरी मानी जाती है।

कुल मिलाकर, ‘नेटीव-लैंग्वेज’ AI का यह ट्रेंड भारत जैसे बहुभाषी श्रम बाजार में हायरिंग को ज्यादा सुलभ और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है—बशर्ते पारदर्शिता, सहमति और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जाए।

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

  1. The Financial ExpressThe Financial Express