एक फोन कॉल और अकाउंट साफ: भारत में साइबर फ्रॉड कैसे काम करता है और बचाव के जरूरी तरीके
रिपोर्ट में बताया गया कि 2026 में साइबर अपराधी नए तरीके अपनाएंगे, लेकिन ठगी का मूल पैटर्न वही रहता है—सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी कॉल, लिंक/ऐप और ओटीपी-आधारित जाल।
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- राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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साइबर फ्रॉड का ‘फोन कॉल’ मॉडल
भारत में ऑनलाइन ठगी के मामलों में एक बड़ा हिस्सा ऐसे हमलों का है जो एक साधारण फोन कॉल से शुरू होते हैं। 6 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, कई पीड़ितों को लगता है कि “सिर्फ कॉल से पैसा निकल गया”, लेकिन वास्तविकता में कॉल अक्सर शुरुआती कदम होता है—इसके बाद ठग लिंक, ऐप, रिमोट एक्सेस, फर्जी केवाईसी, या ओटीपी/यूपीआई पिन जैसे तरीकों से नियंत्रण हासिल करते हैं।

ठग कैसे भरोसा बनाते हैं
साइबर अपराधी खुद को बैंक/कस्टमर केयर/पुलिस/डिलिवरी एजेंट या किसी सरकारी विभाग का प्रतिनिधि बताकर बात शुरू करते हैं। वे घबराहट पैदा करने वाली भाषा का उपयोग करते हैं—जैसे “आपका अकाउंट बंद हो जाएगा”, “केवाईसी तुरंत अपडेट करें”, “रिफंड प्रोसेस करना है” या “आपके नाम से शिकायत है”। उद्देश्य पीड़ित को सोचने का समय न देना होता है।
सबसे आम तकनीकी जाल
- फर्जी लिंक/वेबसाइट: बैंक/पेमेंट ऐप जैसा दिखने वाला पेज, जहां लॉगिन/ओटीपी मांगा जाता है
- स्क्रीन-शेयरिंग/रिमोट ऐप: ‘सपोर्ट’ के नाम पर फोन का कंट्रोल ले लिया जाता है
- यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट: ‘रिफंड’ या ‘वेरिफिकेशन’ कहकर पैसे की रिक्वेस्ट भेजी जाती है
- ओटीपी/पिन/सीवीवी: किसी भी बहाने से संवेदनशील जानकारी निकलवाई जाती है
कैसे करें बचाव (व्यावहारिक नियम)
- किसी भी अनजान कॉल पर ओटीपी, यूपीआई पिन, नेटबैंकिंग पासवर्ड साझा न करें
- ‘रिफंड’ के नाम पर कलेक्ट रिक्वेस्ट स्वीकार न करें—रिफंड हमेशा ‘क्रेडिट’ होता है
- किसी के कहने पर स्क्रीन-शेयरिंग/रिमोट कंट्रोल ऐप इंस्टॉल न करें
- संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले URL और आधिकारिक ऐप/साइट की जांच करें
- धोखाधड़ी की आशंका पर तुरंत बैंक को सूचना दें और अपने पेमेंट ऐप में सेटिंग्स/लिमिट्स चेक करें
2026 में ट्रेंड: हथकंडे नए, सिद्धांत वही
रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि तकनीक बदल सकती है, लेकिन फ्रॉड का मूल सिद्धांत—भरोसा तोड़ना, डर पैदा करना और जल्दी निर्णय करवाना—लगभग वही रहता है। इसलिए जागरूकता और बेसिक साइबर हाइजीन (OTP/पिन की सुरक्षा, ऐप परमिशन की समझ और लिंक की जांच) ही सबसे मजबूत ढाल है।