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दुनिया

यूक्रेन में भारत के लिए ‘एक्सपोर्ट वर्जन’ S-400 मिसाइल इस्तेमाल होने के दावे: रूस पर उठे सवाल

एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूक्रेन में मिले मलबे से संकेत मिलता है कि रूस ने S-400 की 48N6E2 (एक्सपोर्ट वर्जन) मिसाइल का इस्तेमाल किया, जिसे निर्यात के लिए बनाया जाता है। इससे रूस की गोला-बारूद स्थिति और निर्यात प्रतिबद्धताओं पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

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राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक नई रिपोर्ट ने भारत के लिए संवेदनशील संकेत दिए हैं। 25 जनवरी 2026 को प्रकाशित खबर के अनुसार, यूक्रेन में रूसी मिसाइलों के मलबे में S-300PMU2 और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़ी 48N6E2 मिसाइल की पहचान होने का दावा किया गया। इस मिसाइल के कोड में ‘E’ का अर्थ ‘एक्सपोर्ट’ (निर्यात) वर्जन बताया गया है—यानी यह ऐसा संस्करण है जिसे दूसरे देशों को सप्लाई/बेचने के लिए तैयार किया जाता है।

यूक्रेन में भारत के लिए ‘एक्सपोर्ट वर्जन’ S-400 मिसाइल इस्तेमाल होने के दावे: रूस पर उठे सवाल
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रिपोर्ट में कहा गया कि मलबे में मिले पहचान नंबरों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि टुकड़े 48N6E2 के हैं, जिसे 48N6M का निर्यात संस्करण बताया गया है। खबर के मुताबिक, यह पहली बार है जब यूक्रेन में S-400 से जुड़ी मिसाइल के “एक्सपोर्ट वेरिएंट” के इस्तेमाल की चर्चा सामने आई है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह संकेत दे सकता है कि रूस अपने घरेलू भंडार/स्टैंडर्ड गोला-बारूद के दबाव में निर्यात के लिए बने स्टॉक का भी उपयोग कर रहा है।

भारत के संदर्भ में यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि भारत S-400 सिस्टम संचालित कर रहा है और रूस के साथ 2018 में पांच S-400 यूनिट्स का बड़ा समझौता हुआ था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि तय समयसीमा के भीतर सभी डिलीवरी पूरी नहीं हो सकीं और कुछ सिस्टम की आपूर्ति पहले ही देरी से जुड़ी चर्चाओं में रही है। ऐसे परिदृश्य में यदि निर्यात के लिए बनी मिसाइलों का युद्ध में इस्तेमाल हो रहा हो, तो नई दिल्ली के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है—क्योंकि इससे सप्लाई चेन, स्पेयर/मिसाइल स्टॉक और भविष्य की डिलीवरी शेड्यूल प्रभावित होने की आशंका बढ़ती है।

हालांकि, इस तरह के दावों में स्वतंत्र सत्यापन और आधिकारिक प्रतिक्रिया का महत्व होता है। मगर रिपोर्ट के आधार पर यह बहस तेज हो सकती है कि रूस की युद्धकालीन जरूरतें उसके निर्यात दायित्वों के साथ कैसे संतुलित होंगी, और भारत जैसे ग्राहकों को सपोर्ट (मेंटेनेंस, गोला-बारूद, सप्लाई) में कौन-कौन से जोखिम सामने आ सकते हैं।

कुल मिलाकर यह खबर वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में हथियार आपूर्ति, युद्धकालीन उत्पादन/भंडार, और रणनीतिक साझेदारियों की जटिलताओं को उजागर करती है—खासकर तब, जब किसी देश की डिफेंस डिलीवरी देरी और युद्ध के दबाव एक साथ चर्चा में हों।

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

  1. Navbharat TimesNavbharat Times