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बर्लिन ब्लैकआउट के बीच मेयर के ‘टेनिस ब्रेक’ पर बवाल, आगजनी को बताया गया कारण

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में दशकों के सबसे लंबे ब्लैकआउट के दौरान मेयर काई वेगनर के टेनिस खेलने की बात सामने आने पर उनकी आलोचना बढ़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक बिजली गुल होने की वजह एक केबल ब्रिज पर आगजनी थी।

रिपोर्ट
राष्ट्रीय खबरें न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में पिछले कुछ वर्षों के सबसे बड़े और लंबे बिजली संकट के दौरान शहर के मेयर काई वेगनर की भूमिका पर तीखी बहस छिड़ गई है। DW की रिपोर्ट के मुताबिक, वेगनर ने पत्रकारों से बातचीत में स्वीकार किया कि ब्लैकआउट के पहले दिन उन्होंने टेनिस खेला। इसके बाद विपक्षी दलों और आलोचकों ने सवाल उठाया कि जब हजारों लोग ठंड में बिजली, हीटिंग और फोन सेवा से वंचित थे, तब शहर का नेतृत्व किस तरह प्रतिक्रिया दे रहा था।

बर्लिन ब्लैकआउट के बीच मेयर के ‘टेनिस ब्रेक’ पर बवाल, आगजनी को बताया गया कारण
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ब्लैकआउट कितना बड़ा था?

रिपोर्ट के अनुसार यह बिजली कटौती बर्लिन के लिए दशकों में सबसे गंभीर मानी जा रही है। शुरूआती चरण में 45,000 घरों और 2,200 व्यवसायों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। ठंड के मौसम में करीब 100,000 निवासियों को हीटिंग की समस्या भी हुई, क्योंकि तापमान शून्य के आसपास बना हुआ था। बिजली पूरी तरह बहाल होने में लगभग पांच दिन लगे, जिससे यह बर्लिन के युद्धोत्तर इतिहास का सबसे लंबा ब्लैकआउट बताया गया।

क्यों हुई बिजली गुल?

DW के मुताबिक, यह संकट शहर के दक्षिण-पश्चिम में एक केबल ब्रिज पर आगजनी (arson attack) के कारण शुरू हुआ। शुरुआती जांच में इसी हमले को ब्लैकआउट का प्रमुख कारण माना गया। इतनी बड़ी अवधि तक बिजली बहाल न हो पाने ने बर्लिन के ऊर्जा ढांचे, आपात प्रतिक्रिया व्यवस्था और शहर प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए।

मेयर पर आलोचना क्यों?

आलोचकों का कहना है कि संकट के शुरुआती घंटों में नेतृत्व का प्रतीकात्मक व्यवहार भी जनता के भरोसे को प्रभावित करता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वेगनर पर यह आरोप लगा कि उन्होंने शनिवार को प्रभावित इलाकों का दौरा नहीं किया और इसके बजाय घर से तथा कार्यालय से काम किया। वेगनर के समर्थक इसे निजी समय का उपयोग मानकर कम गंभीर बताते हैं, लेकिन विपक्ष इसे संवेदनशीलता की कमी के तौर पर पेश कर रहा है।

आगे क्या?

बर्लिन में इस घटना ने दो बहसें तेज कर दी हैं: पहली, आपात स्थितियों में नेतृत्व का व्यवहार और संवाद; दूसरी, महत्वपूर्ण शहरी ढांचे की सुरक्षा। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, आगजनी के पीछे जिम्मेदारी तय होने और भविष्य में ऐसे हमलों से बचाव के लिए नई सुरक्षा व्यवस्थाओं की मांग भी मजबूत हो सकती है।

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स्रोत और रिपोर्टिंग रिकॉर्ड

  1. DWDW